अध्याय: जीव जनन कैसे करते हैं?(How Do Organisms Reproduce?)

 

अध्याय: जीव जनन कैसे करते हैं?(How Do Organisms Reproduce?)

परिचय (Introduction) - जनन क्या है?

  • जनन सभी जीवों (पौधों एवं जंतुओं) का एक अनिवार्य लक्षण है।
  • अपनी जाति या वंश की निरंतरता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए, अपने ही जैसे नए जीवों को पैदा करने की प्रक्रिया को जनन या प्रजनन (reproduction) कहते हैं।
  • जीव की जनन क्षमता उसके शरीर में उपस्थित डी०एन०ए० (DNA) के कारण होती है, जिसमें अपनी प्रतिकृति (copy) बनाने या द्विगुणन (duplication) की क्षमता होती है।
    REPRODUCTION

जनन का महत्व (Importance of Reproduction):

  1. निरंतरता: इसके द्वारा जीव अपनी जाति की निरंतरता को बनाए रखते हैं और अपनी संख्या में वृद्धि करते हैं।
  2. वंशागति: जनन द्वारा आनुवंशिक लक्षण माता-पिता से संतानों में वंशागत होते हैं, जिससे संतान अपने जनकों के समान दिखाई देती है।
  3. विभिन्नताएँ और विकास: जनन द्वारा संतानों में कुछ विभिन्नताएँ (variations) भी आती हैं, जो कि आगे चलकर जैविक विकास (Evolution) का मुख्य आधार बनती हैं।
  4. उत्तरजीविता: यह विभिन्नताएँ किसी भी जाति (species) की उत्तरजीविता (survival) को बनाए रखने में उपयोगी होती हैं।

क्या जीव पूर्णतः अपनी प्रतिकृति का सृजन करते हैं?

  • प्रजनन में डी०एन०ए० (deoxyribonucleic acid) की प्रतिकृति (copy) बनना प्राणी के अस्तित्व के लिए बहुत आवश्यक है।
  • हालाँकि, डी०एन०ए० की प्रतिकृति बनने की यह जैव-रासायनिक प्रक्रिया पूरी तरह से यथार्थ (100% सटीक) नहीं होती है, जिसके कारण इसमें कुछ विभिन्नता उत्पन्न हो जाती है।
  • डी०एन०ए० कोशिका के केंद्रक में मौजूद होता है और इसमें प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचनाएँ विद्यमान होती हैं। यदि यह सूचना बदलती है, तो बनने वाला प्रोटीन भी बदल जाएगा, जिसके कारण जीव की शारीरिक बनावट में विविधता उत्पन्न हो जाती है।
  • लैंगिक जनन (जिसमें दो विभिन्न जीव भाग लेते हैं) के द्वारा इन विभिन्नताओं के नए संयोजन उत्पन्न होते हैं, जो पीढ़ियों तक आगे बढ़ते रहते हैं।

विभिन्नता का महत्व (The Importance of Variation):

  • जीवों के पारितंत्र (ecosystem) और उनके रहने के स्थान (niche) में स्थिरता का सीधा संबंध जनन से होता है।
  • कभी-कभी जीवों के नियंत्रण से बाहर के कारणों से निकेत (niche) में उग्र परिवर्तन आ जाते हैं, जैसे— वैश्विक ऊष्मीकरण (global warming) के कारण तापमान का बढ़ना, समुद्र के जल स्तर में बदलाव या किसी उल्कापिंड का पृथ्वी से टकराना।
  • इन उग्र परिवर्तनों के कारण किसी भी प्रजाति की पूरी समष्टि (population) का विनाश हो सकता है।
  • बचाव का तरीका: यदि समष्टि के जीवों में कुछ विभिन्नताएँ (variations) होंगी, तो उनके जीवित रहने की कुछ सम्भावना बची रहती है। उदाहरण के लिए, यदि जल का तापमान अचानक बहुत अधिक बढ़ जाए, तो केवल वे जीवाणु ही बच पाएंगे जिनमें गर्मी को सहन कर सकने की विभिन्नता (क्षमता) होगी।
  • निष्कर्ष: विभिन्नताएँ (variations) पूरी स्पीशीज़ की उत्तरजीविता बनाए रखने के लिए बहुत लाभदायक और आवश्यक हैं, यद्यपि यह ज़रूरी नहीं कि वह एक अकेले जीव (individual) के लिए भी फायदेमंद हों।


जीवों में अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction in Organisms)
 यह मुख्य रूप से निम्न श्रेणी के जीवों में जनन की एक प्रमुख विधि है।

1. विखण्डन (Fission) इसमें एककोशिकीय जीव (जैसे अमीबा, पैरामीशियम आदि) समसूत्री विभाजन द्वारा दो या अधिक जीवों में विभाजित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में पहले केन्द्रक और फिर कोशिकाद्रव्य का विभाजन होता है। इसके दो मुख्य प्रकार हैं:

  • (i) द्विविखण्डन (Binary fission): इसमें पैतृक जीव दो बराबर भागों में विभाजित होता है।
    • अमीबा: इसमें वृद्धि के बाद केन्द्रक और फिर कोशिकाद्रव्य का विभाजन होता है जिससे 2 संतति अमीबा बनते हैं। (यह विभाजन किसी भी तल से हो सकता है)।
    • लेस्मानिया: यह काला-अजार रोग का परजीवी है। इसमें विभाजन एक निर्धारित तल (फ्लेजिलम) से होता है।
  • (ii) बहुविखण्डन (Multiple fission): इसमें पैतृक जीव एक ही समय पर अनेक संतति कोशिकाओं में विभाजित होकर नये जीवों को पैदा करता है।
    • प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी): इसमें कोशिका के चारों ओर एक सुरक्षा भित्ति (protective wall) बन जाती है। इसके अंदर केन्द्रक कई बार विभाजित होकर बहुत-से संतति केन्द्रक बनाता है और प्रत्येक के चारों ओर कोशिकाद्रव्य एकत्रित हो जाता है। अनुकूल परिस्थिति आने पर भित्ति फटती है और लगभग 1000 संतति कोशिकाएँ एक साथ बाहर आती हैं।

2. मुकुलन या कलिकोत्पादन (Budding) इस विधि में पैतृक जनक जीव के शरीर पर एक बाह्य वृद्धि (outgrowth) से उभार बन जाता है, जिसे मुकुल या कलिका (bud) कहते हैं। यह कलिका अलग होकर नया जीव बनाती है।

  • हाइड्रा (Hydra): इसमें कलिका (जो कोशिकाओं का समूह होती है) वृद्धि करके छोटा हाइड्रा (मुँह व स्पर्शक सहित) बनाती है और फिर पैतृक शरीर से अलग हो जाती है।
  • यीस्ट (Yeast): यह एककोशिकीय कवक है जिसमें कोशिका भित्ति के बाहर उभार (bud) बनते हैं। केन्द्रक विभाजित होकर एक भाग कलिका में चला जाता है। कभी-कभी ये कलिकाएँ पैतृक कोशिका से अलग हुए बिना ही कलिकाओं की एक शृंखला (chain) बना लेती हैं।

3. पुनरुद्भवन (Regeneration) यदि किसी कारणवश जीव का शरीर क्षत-विक्षत हो जाता है या कई टुकड़ों में टूट जाता है, तो ये टुकड़े वृद्धि करके नये जीव में विकसित हो जाते हैं।

  • उदाहरण: सरल जीव जैसे हाइड्रा और प्लेनेरिया (Planaria)।
  • यह प्रक्रिया विशिष्ट कोशिकाओं द्वारा होती है, जो प्रसरण कर नया ऊतक बनाती हैं (परिवर्धन)।
  • महत्त्वपूर्ण नोट: पुनरुद्भवन पूरी तरह से जनन के समान नहीं है, क्योंकि अधिकांश सरल जीव शरीर के किसी भी भाग को काटकर नया जीव उत्पन्न नहीं कर सकते।

अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य (अभ्यास प्रश्नों के आधार पर):

  • बीजाणु जनन (Spore Formation): राइजोपस (कवक) में जनन के लिए बीजाणु (Spores) एक विशिष्ट भाग के अंदर बनते हैं जिसे बीजाणुधानी (Sporangia) कहा जाता है।
  • विखण्डन (Fission) और खण्डन (Fragmentation) में अंतर: विखण्डन मुख्य रूप से एककोशिकीय जीवों में होता है, जबकि खण्डन बहुकोशिकीय जीवों (जैसे स्पाइरोगाइरा) में होता है।

(विज्ञान को रटें नहीं, समझें!)

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